आवारा पशुओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एऩएचएआई ने मांगी स्पष्टता, सीजेआई सुनवाई को तैयार
।एनएचएआई ने सुप्रीम कोर्ट से नेशनल हाईवे पर आवारा मवेशियों के प्रबंधन संबंधी आदेश पर स्पष्टीकरण मांगा है। उसने कहा कि जानवरों को हटाने और आश्रय देने की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों तथा स्थानीय निकायों की है। एनएचएआई सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन अकेले शेल्टर व ट्रांसपोर्ट चलाना उसके वैधानिक और वित्तीय दायरे से बाहर है।
नेशनल हाईवेज़ अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से आवारा जानवरों के बारे में 19 मई के फ़ैसले पर स्पष्टीकरण मांगा। इसमें खास तौर पर उस निर्देश पर स्पष्टीकरण मांगा गया जिसमें नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर आवारा मवेशियों और अन्य जानवरों से निपटने के लिए एक सिस्टम बनाने को कहा गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस अर्ज़ी का ज़िक्र करते हुए इसे जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट करने का अनुरोध किया। CJI ने इसे उस स्पेशल बेंच के सामने रखने पर सहमति जताई जिसने मूल निर्देश जारी किए थे। NHAI ने स्पष्टीकरण मांगा है कि आवारा जानवरों को हटाने, ज़ब्त करने और उन्हें आश्रय देने की मुख्य कानूनी ज़िम्मेदारी राज्य के अधिकारियों, स्थानीय निकायों और तय हाईवे प्रशासन की है, न कि अकेले NHAI की। यह अपील 19 मई के उस फ़ैसले से जुड़ी है जिसमें NHAI से कहा गया था कि वह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करे और विशेष गाड़ियां, होल्डिंग सुविधाएं, आश्रय स्थल और पशु कल्याण संगठनों व गौशालाओं के साथ व्यवस्था जैसे उपाय करे। दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी
NHAI का तर्क है कि 'नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया एक्ट, 1988' और 'कंट्रोल ऑफ़ नेशनल हाईवेज़ (लैंड एंड ट्रैफ़िक) एक्ट, 2002' के तहत उसकी कानूनी ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से हाईवे के विकास, रखरखाव और प्रबंधन से जुड़ी है। उसने 2002 के एक्ट की धारा 37 का भी ज़िक्र किया है, जिसमें हाईवे पर रुकावट पैदा करने वाले जानवरों को हटाने और उन्हें हिरासत में लेने का प्रावधान है। NHAI के अनुसार, अक्टूबर 2025 में ज़िला मजिस्ट्रेटों को संबंधित हिस्सों के लिए हाईवे प्रशासन के तौर पर अधिसूचित किया गया था और इसलिए कानूनी ढांचे के तहत वे ही मुख्य मैदानी अधिकारी हैं। अथॉरिटी ने कहा है कि वह आवारा जानवरों को हटाने और उन्हें ले जाने में सहयोग और सुविधा देने तथा राज्यों, स्थानीय निकायों और गौशालाओं के साथ मिलकर काम करने को तैयार है, लेकिन उससे देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर आश्रय स्थल, गौशालाएं या ट्रांसपोर्ट फ़्लीट अकेले स्थापित करने या चलाने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।NHAI ने हाईवे नेटवर्क के बड़े दायरे—करीब 1.46 लाख किलोमीटर—का भी ज़िक्र किया है और कहा है कि इसके किनारे शेल्टर बनाने के लिए काफ़ी खास इंफ्रास्ट्रक्चर, मैनपावर और फ़ंडिंग की ज़रूरत होगी, जो उसके मौजूदा कानूनी और बजट से जुड़े दायरों से कहीं ज़्यादा है।



