आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजनिया की पीठ ने एमिकस क्यूरी गौरेव अग्रवाल की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत को दी गई।

पीठ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से पेश अधिवक्ता की दलीलें भी सुनीं। ये दलीलें 7 नवंबर 2025 के उस आदेश के अनुपालन से जुड़ी थीं, जिसमें एनएचएआई को राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने और सड़कों के किनारे जाली लगाने के निर्देश दिए गए थे।

एनजीओ के आवेदनों पर जल्द निर्णय का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) को निर्देश दिया कि पशु आश्रय स्थल और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर खोलने के लिए गैर-सरकारी संगठनों द्वारा दिए गए आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। पीठ ने स्पष्ट कहा कि या तो आवेदन स्वीकार किए जाएं या खारिज, लेकिन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

AWBI की ओर से बताया गया कि 7 नवंबर के आदेश के बाद ऐसे आवेदनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

राज्यों की लापरवाही पर कोर्ट सख्त
इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों द्वारा आवारा कुत्तों की नसबंदी न कराने, डॉग पाउंड न बनाने और शैक्षणिक व अन्य संस्थानों से कुत्तों को न हटाने पर कड़ी नाराजगी जताई। पीठ ने टिप्पणी की कि राज्यों की दलीलें वास्तविक कार्रवाई के बजाय “हवा में महल” जैसी प्रतीत होती हैं। अदालत ने कहा कि निर्देशों के पालन के नाम पर केवल कहानियां सुनाई जा रही हैं।

असम के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने असम से सामने आए आंकड़ों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत के अनुसार, वर्ष 2024 में राज्य में कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले दर्ज किए गए, जबकि पूरे राज्य में केवल एक डॉग सेंटर है। वहीं जनवरी 2025 में ही 20,900 लोगों को कुत्तों ने काटा, जिसे अदालत ने बेहद चिंताजनक बताया।

शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपनी लिखित दलीलें शीघ्र दाखिल करें। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है, जिससे देशभर में आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान की दिशा तय होगी।