निजी स्कूलों से परीक्षा आयोजन का अधिकार छीना, डीपीआई के आदेश से हड़कंप
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी नए आदेश ने प्रदेशभर के निजी स्कूलों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। आदेश के तहत अब निजी स्कूलों से पहली से चौथी, छठवीं–सातवीं, नवमी और ग्यारहवीं कक्षा की परीक्षाएं आयोजित कराने का अधिकार छीन लिया गया है। अब इन कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के माध्यम से आयोजित कराई जाएंगी।
यह आदेश शासकीय विद्यालयों के साथ-साथ अनुदान प्राप्त, अशासकीय विद्यालय और स्वामी आत्मानंद विद्यालयों पर भी लागू होगा। हालांकि सीबीएसई, आईसीएसई और भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
जिला स्तर पर बनेगी समितियां, DEO जारी करेंगे टाइम टेबल
आदेश के अनुसार, जिला स्तर पर जिला स्तरीय संचालन समिति, प्रश्नपत्र निर्माण समिति और मॉडरेशन समिति का गठन 5 फरवरी तक किया जाएगा। परीक्षा की तैयारी के लिए सैंपल प्रश्नपत्र बनाकर छात्रों को अभ्यास कराया जाएगा। सभी कक्षाओं का पाठ्यक्रम 28 फरवरी तक पूरा कर रिवीजन कराया जाएगा। वार्षिक परीक्षाएं 25 मार्च से 10 अप्रैल के बीच होंगी, जिनकी समय-सारणी जिला शिक्षा अधिकारी जारी करेंगे।
प्रश्नपत्र और मूल्यांकन की समय-सीमा तय
प्रश्नपत्र निर्माण समिति को 15 फरवरी तक तीन सेट में प्रश्नपत्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मॉडरेशन 20 फरवरी तक पूरा होगा और 25 फरवरी तक प्रश्नपत्र मुद्रण के लिए भेजे जाएंगे। 15 मार्च तक प्रश्नपत्र DEO को सौंपे जाएंगे और 20 मार्च तक संकुल स्तर पर वितरण किया जाएगा।
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्थानीय स्तर पर विषय शिक्षक करेंगे। कॉपियों की जांच 20 अप्रैल तक और परिणाम 30 अप्रैल तक घोषित करने के निर्देश हैं।
अंक प्रणाली और कक्षोन्नति का प्रावधान
पहली से चौथी और छठवीं–सातवीं में त्रैमासिक के 20%, छमाही के 20% और वार्षिक के 60% अंक जोड़कर परिणाम तैयार होगा। नवमी और ग्यारहवीं में छमाही के 30% और वार्षिक के 70% अंक जोड़े जाएंगे।
आदेश में यह भी कहा गया है कि अनुपस्थित छात्रों को पूरक परीक्षा का अवसर मिलेगा। पहली से चौथी और छठवीं–सातवीं में पूरक में भी अनुत्तीर्ण होने पर छात्र को अगली कक्षा में पदोन्नत किया जाएगा, किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जाएगा।
निजी स्कूल संघ का कड़ा विरोध
आदेश जारी होते ही निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया। मंगलवार रात निजी स्कूल संघ की आपातकालीन ऑनलाइन बैठक हुई, जिसमें आदेश का विरोध करने का फैसला लिया गया।
निजी स्कूल संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि कई स्कूल पहले ही अपनी परीक्षा समय-सारिणी घोषित कर चुके हैं। ऐन समय पर इस तरह का फैसला “तुगलकी फरमान” है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो निजी स्कूल अपने संस्थान बंद कर चाबियां शासन को सौंपने पर मजबूर होंगे।
फिलहाल इस फैसले को लेकर शिक्षा विभाग और निजी स्कूल प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।



