ऐतिहासिक निर्णय : अब महंगाई राहत (DR) के लिए दूसरे राज्य की सहमति जरूरी नहीं, पेंशनरों को मिलेगा समय पर लाभ — फेडरेशन ने मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री का जताया आभार

ऐतिहासिक निर्णय : अब महंगाई राहत (DR) के लिए दूसरे राज्य की सहमति जरूरी नहीं, पेंशनरों को मिलेगा समय पर लाभ — फेडरेशन ने मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री का जताया आभार

रायपुर । मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग द्वारा आदेश क्रमांक ई-1077487/2026/नियम/04/वित्त, दिनांक 17 जुलाई 2026 के माध्यम से मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनरों को महंगाई राहत (DR) प्रदान किए जाने की वर्तमान पारस्परिक सहमति की व्यवस्था पर पुनर्विचार करते हुए प्रशासनिक सुगमता एवं पेंशनरों के हित में महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार अब महंगाई राहत घोषित करने के लिए दूसरे राज्य की सहमति प्राप्त करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। साथ ही पेंशनरों को देय महंगाई राहत में वृद्धि के लिए विधायी संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी तथा दोनों राज्य सीधे कार्यकारी आदेश जारी करेंगे। महंगाई राहत में वृद्धि से संबंधित वित्तीय भार की जानकारी दोनों राज्य एक-दूसरे को पत्र के माध्यम से उपलब्ध कराएंगे तथा कोई भी राज्य केंद्र सरकार द्वारा घोषित महंगाई राहत की दर से अधिक दर घोषित नहीं करेगा।

यह आदेश डॉ. रोहित यादव, सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, वित्त विभाग तथा श्री मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी किया गया है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक श्री कमल वर्मा एवं पेंशनर्स फोरम के संयोजक श्री बी. पी. शर्मा ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि राज्य के पेंशनरों को महंगाई राहत में हो रहे लगातार विलंब एवं आर्थिक नुकसान को लेकर फेडरेशन और पेंशनर्स फोरम लंबे समय से लगातार संघर्ष कर रहे थे। इस संबंध में मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को अनेक ज्ञापन प्रेषित किए गए तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को भी पत्र लिखकर राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) के नाम पर लागू सहमति संबंधी बाध्यता समाप्त करने की मांग की गई थी।

फेडरेशन ने अपने ज्ञापनों में स्पष्ट किया था कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) में महंगाई राहत स्वीकृत करने के लिए दूसरे राज्य की सहमति का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद इसी आधार पर निर्णयों में अनावश्यक विलंब किया जाता रहा, जिससे छत्तीसगढ़ के हजारों पेंशनरों को केंद्र सरकार एवं अन्य राज्यों के पेंशनरों की तुलना में कम दर पर महंगाई राहत प्राप्त होती रही और उन्हें निरंतर आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।

फेडरेशन ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य गठन के बाद बने अन्य राज्यों—उत्तराखंड एवं झारखंड—में पेंशनरों को महंगाई राहत प्रदान करने के लिए क्रमशः उत्तर प्रदेश एवं बिहार की सहमति नहीं ली जाती। ऐसे में छत्तीसगढ़ के पेंशनरों के साथ अलग व्यवस्था अपनाया जाना समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत था।

फेडरेशन ने कहा कि नए निर्णय से छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के लाखों पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा तथा वर्षों से चली आ रही अनावश्यक प्रशासनिक बाधा समाप्त हो जाएगी।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन एवं पेंशनर्स फोरम ने पेंशनरों के हित में लिए गए इस ऐतिहासिक एवं सराहनीय निर्णय के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा छत्तीसगढ़ शासन के वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया है। साथ ही दोनों राज्यों के वित्त विभाग के अधिकारियों द्वारा पेंशनरों के हित में लिए गए इस सकारात्मक निर्णय का स्वागत करते हुए इसे पेंशनरों के लिए बड़ी राहत बताया है।