शिव की बारात
डॉ मीता अग्रवाल मधुर रायपुर छत्तीसगढ़
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महादेव वेशभूषा नागराज चंद्र जूड़ा।
भस्मी राख मलेअंग, सर्पों से सजाएं है।
नंदी की सवारी करे,रुंड मुंड गले धरें।
बाघाम्बर छाल धारी त्रिशूल सुहाए हैं।
अजब-गजब साज, झूमे तीनों लोक नाज,
भूत प्रेत नाचते हैं देख डरवाए है।
भूत भावन ले संग,राख मलें अंग अंग।
अजनबी से बाराती, झूमे दाएं बाएं है।
मन मन कांपे मैंना, आंसुओं से भरे नैना।
बराती अजब देख मन घबराएं है।
विधि का मिटे न लेख, गौरा मैया खुशी देख।
नर-नारी नाते रिश्ते खुशियां मनाएं है।
गौरा मन मुदित है,अंग अंग पुलकित
लीला त्रिपुरारी देख,
देव मुस्कुराएं है।
महाशिवरात्रि आज,मैना घर बाजें साज।
शिवा को बिहाने शिव, हिमाचल आएं हैं।