कम ईंधन में ज्यादा बिजली: परमाणु ऊर्जा से गांवों में विकास और रोजगार को मिलेगा बल विधायक पुरन्दर मिश्रा बोले: “गांव मजबूत होंगे तभी बनेगा विकसित भारत 2047”
रायपुर - भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित “TRANSFORMING RURAL INDIA FOR Viksit Bharat@2047: Convergence, Governance and Rural Prosperity” विषयक राष्ट्रीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के 10 विधायकों की गरिमामयी सहभागिता रही। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास के साथ-साथ देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, विशेषकर न्यूक्लियर ऊर्जा (परमाणु ऊर्जा) को लेकर व्यापक चर्चा की गई।
रायपुर उत्तर के विधायक पुरन्दर मिश्रा ने कहा कि “ग्रामीण विकास ही विकसित भारत 2047 की आधारशिला है। जब गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी राष्ट्र समृद्ध बनेगा।” उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक, ऊर्जा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में श्री तरुण चुग ने ग्रामीण सशक्तिकरण को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार बताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी और न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पॉवर,सूर्य सोलर , जल, कोयला और परमाणु ऊर्जा के संतुलित उपयोग पर कार्य कर रही है। न्यूक्लियर सेक्टर में बड़े निवेश के तहत लगभग 3700 हजार करोड़ रुपए के बजट प्रावधान के जरिए देश में आधुनिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
परमाणु ऊर्जा कैसे बनती है
कार्यक्रम में बताया कि परमाणु ऊर्जा यूरेनियम जैसे तत्वों के परमाणु विभाजन (न्यूक्लियर फिशन) से उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया में निकलने वाली ऊष्मा से पानी को भाप में बदला जाता है, जो टर्बाइन को घुमाकर बिजली पैदा करती है। यह तकनीक कम ईंधन में अधिक बिजली देने में सक्षम है और कार्बन उत्सर्जन भी कम करती है।
ग्रामीण विकास में भूमिका
परमाणु ऊर्जा से मिलने वाली स्थिर और सस्ती बिजली का सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा। इससे सिंचाई, कृषि आधारित उद्योग, कोल्ड स्टोरेज और छोटे उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
कार्यक्रम में डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, डॉ. भगवंत राव और पी.के. अग्रवाल सहित अन्य अतिथियों ने भी ग्रामीण विकास और ऊर्जा क्षेत्र में नई रणनीतियों पर अपने विचार रखे।
अंत में छत्तीसगढ़ के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, आधुनिक कृषि तकनीकों और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
यह कार्यक्रम न केवल विचार-विमर्श का मंच साबित हुआ, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए ग्रामीण विकास और न्यूक्लियर ऊर्जा जैसे मजबूत स्तंभों पर आधारित ठोस रणनीति का संकेत भी देता है।



