राजभाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प—कार्यालय स्थापना दिवस समारोह में विधायक पुरन्दर मिश्रा की गरिमामयी सहभागिता

छत्तीसगढ़ की भाषा-संस्कृति को नई ऊंचाई देने का संकल्प—पुरन्दर मिश्रा मातृभाषा के मान से संस्कृति के सम्मान तक, राजभाषा आयोग समारोह में पुरन्दर मिश्रा की सहभागिता छत्तीसगढ़ी अस्मिता से साहित्यिक गौरव तक—पुरन्दर मिश्रा ने दिया भाषा-संरक्षण का संदेश

राजभाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प—कार्यालय स्थापना दिवस समारोह में विधायक पुरन्दर मिश्रा की गरिमामयी सहभागिता

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध भाषायी एवं सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस का गरिमामय समारोह न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, रायपुर में आयोजित हुआ। समारोह में उत्तर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा जी ने सहभागिता कर हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर साहित्य एवं भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों का सम्मान किया गया। साथ ही विभिन्न पुस्तकों का विमोचन तथा समाज और राष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को राजकीय गमछा एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा जी ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, परंपरा, संस्कार और संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। छत्तीसगढ़ी भाषा और यहां की समृद्ध लोक-साहित्य परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है। इसे संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोकभाषा, लोककला, लोकगीत, लोकसाहित्य और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से है। राजभाषा आयोग जैसे संस्थान इन परंपराओं को संस्थागत मंच प्रदान करते हुए भाषा और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी को भी हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य से जोड़ा जाए और स्थानीय रचनाकारों की प्रतिभा को व्यापक मंच उपलब्ध कराया जाए।

श्री मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी की मिठास और हिंदी की व्यापकता मिलकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाती है। भाषा के संरक्षण के साथ-साथ साहित्यकारों और रचनाकारों का सम्मान समाज में सृजनात्मक चेतना को प्रोत्साहित करता है।

इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री मोतीलाल साहू जी, छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन जी, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा जी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, साहित्यकार, भाषा-प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

समारोह ने यह संदेश दिया कि भाषा का सम्मान अपनी जड़ों का सम्मान है और साहित्य का संरक्षण अपनी संस्कृति के भविष्य को सुरक्षित करना है। छत्तीसगढ़ की हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य की गौरवशाली परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन निश्चित रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।