पितृ मोक्ष अमावस्या पर कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल द्वारा दिवंगत आत्माओं को सामूहिक श्रद्धांजलि एवं पितृ पक्ष की महत्ता पर आध्यात्मिक प्रवचन
रायपुर। पितृ मोक्ष अमावस्या के पावन अवसर पर कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल, आशीर्वाद भवन रायपुर द्वारा समाज के दिवंगत सदस्यों एवं समस्त पूर्वजों की स्मृति में सामूहिक श्रद्धांजलि सभा एवं आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया। इस भावपूर्ण आयोजन में दिवंगत आत्माओं को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही, समाज के समस्त पूर्व अध्यक्षों के योगदान को भी कृतज्ञतापूर्वक याद किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि हमारे पूर्वजों का त्याग, उनके संस्कार, स्नेह, आशीर्वाद और समाज के प्रति उनका योगदान हमारी अमूल्य धरोहर हैं। उनका जीवन और उनके द्वारा स्थापित आदर्श सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि अर्पित करने का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, पारिवारिक मूल्यों और सनातन परंपराओं से जुड़ने का एक भावपूर्ण अवसर भी है।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के उपाध्यक्ष श्री संजय अवस्थी ने महाराज श्री राजीव लोचन जी का संक्षिप्त परिचय देते हुए अपने विचार व्यक्त किए। इसके पश्चात सभा के अध्यक्ष श्री सुरेश मिश्रा एवं सचिव श्री राजकुमार दीक्षित ने इस प्रकार के आयोजन को प्रतिवर्ष निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परिवारजनों एवं समाज के सहयोग से दिवंगत आत्माओं के प्रति सच्ची श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की यह परंपरा आगे भी जारी रखी जाएगी।
कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री अजय अवस्थी ने किया। इस अवसर पर महाराज श्री राजीव लोचन जी ने अपनी मधुर वाणी में पितृ पक्ष की आध्यात्मिक महत्ता का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में पितरों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। देवताओं तक हमारी प्रार्थना पहुँचने से पूर्व पितरों का स्मरण और उनका आशीर्वाद हमारे जीवन में विशेष महत्व रखता है। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि पितरों के प्रति श्रद्धा केवल पितृ पक्ष तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रतिदिन अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। जिस प्रकार हम प्रतिदिन सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं, उसी प्रकार पितरों का स्मरण कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित करनी चाहिए।
महाराज जी के लगभग एक घंटे तक चले आध्यात्मिक प्रवचन को उपस्थित समाजजनों ने पूर्ण एकाग्रता, शांति एवं श्रद्धाभाव से सुना। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमुदाय को अपने पूर्वजों के प्रति कर्तव्य, कृतज्ञता और सनातन संस्कारों के महत्व का आत्मबोध कराया।
सभा के अध्यक्ष श्री सुरेश मिश्रा, सचिव श्री राजकुमार दीक्षित, संयोजक श्री गिरिजाशंकर दीक्षित एवं उनकी पूरी टीम का इस सराहनीय पहल के लिए विशेष अभिनंदन किया गया। इस आयोजन ने समाज के सदस्यों को एक सूत्र में पिरोते हुए सामूहिक रूप से अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।
ऐसे आयोजन समाज की एकता, सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक संस्कारों को सुदृढ़ करते हैं। साथ ही, दिवंगत सदस्यों के शोकसंतप्त परिजनों को यह विश्वास भी दिलाते हैं कि दुख की घड़ी में पूरा समाज उनके साथ खड़ा है। पूर्वजों के प्रति सम्मान और स्मरण की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों में भी संस्कार, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना जागृत करती रहेगी।
अंत में ईश्वर से प्रार्थना की गई कि वे समस्त दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दें।



