CGPSC में दो महीने से नेतृत्व का सूखा: क्यों नहीं हो रही अध्यक्ष की नियुक्ति और क्या पड़ रहा है असर?
छत्तीसगढ़, 5 नवंबर 2026
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) पिछले दो महीनों से बिना किसी मुखिया (अध्यक्ष) के चल रहा है। आयोग की पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रीता शांडिल्य का कार्यकाल 8 सितंबर 2026 को समाप्त होने के बाद से यह महत्वपूर्ण संवैधानिक पद रिक्त पड़ा है। राज्य सरकार द्वारा अभी तक न तो किसी स्थायी अध्यक्ष का नाम तय किया गया है और न ही आयोग के मौजूदा सदस्यों में से किसी को कार्यवाहक जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस देरी से राज्य के हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
नियुक्ति में देरी के प्रमुख कारण (सूत्रों के अनुसार)
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, नियुक्ति में देरी के पीछे निम्नलिखित मुख्य वजहें सामने आ रही हैं:
1. पारदर्शिता और बेदाग चेहरे की तलाश: पिछले कुछ समय में सीजीपीएससी भारी विवादों और कथित भर्ती घोटालों के आरोपों से घिरा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार किसी ऐसे प्रशासनिक अधिकारी या बेदाग छवि वाले व्यक्ति की तलाश में है, जिस पर कोई उंगली न उठा सके और आयोग की साख दोबारा बहाल हो सके।
2. नामों पर सस्पेंस: कयासों के दौर में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों (जैसे रेणु पिल्ले) के नाम चर्चा में जरूर आए, लेकिन अंतिम मुहर को लेकर सरकार के भीतर उच्च स्तरीय मंथन जारी है और सहमति बनने में वक्त लग रहा है।
3. विपक्षी दल के आरोप: मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि यह देरी प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय प्रबंधन में नाकामी को छुपाने की एक कोशिश है, ताकि नई नियुक्तियां और भर्तियां आगे न बढ़ानी पड़ें।
क्या-क्या काम अटके? (युवाओं और अधिकारियों पर असर)
अध्यक्ष का पद खाली होने से नीतिगत फैसले पूरी तरह से रुक गए हैं, जिसके कारण परीक्षा चक्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है:
* राज्य सेवा परीक्षा-2025 के इंटरव्यू ठप: मुख्य परीक्षा पास कर चुके 608 अभ्यर्थी साक्षात्कार (Interview) और दस्तावेज़ सत्यापन की राह देख रहे हैं। 23 सितंबर से शुरू होने वाले इन साक्षात्कारों को अध्यक्ष न होने के कारण स्थगित कर दिया गया था।
* नई भर्ती परीक्षाओं पर संकट: लोक निर्माण विभाग (40 पद) और पुलिस विभाग के तहत उप निरीक्षक, सूबेदार व प्लाटून कमांडर (297 पद) जैसी कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं अनिश्चितकाल के लिए टल चुकी हैं।
* राज्य सेवा परीक्षा-2026 का विज्ञापन: छत्तीसगढ़ में हर साल 26 नवंबर (संविधान दिवस) को राज्य सेवा परीक्षा का नया विज्ञापन जारी करने की परंपरा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 26 नवंबर तक अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई, तो आगामी सत्र (2026) का विज्ञापन भी समय पर जारी नहीं हो पाएगा।
* सरकारी कर्मचारियों का प्रमोशन अटका: छत्तीसगढ़ प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर चिंता जताई है कि आयोग में अध्यक्ष न होने से प्रदेश के 54 विभागों में कार्यरत सैकड़ों अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति (DPC) की प्रक्रिया पूरी तरह अटक गई है।
आगे क्या?
फिलहाल आयोग का कामकाज तीन सदस्य संभाल रहे हैं, लेकिन नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार केवल अध्यक्ष के पास ही सुरक्षित होता है। अभ्यर्थियों और अधिकारी संगठनों की ओर से सरकार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि इस प्रशासनिक गतिरोध को तत्काल समाप्त किया जाए। अब युवाओं की नज़रें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या इस महीने की 26 तारीख से पहले राज्य को नया पीएससी अध्यक्ष मिल पाता है या नहीं।



