रायपुर में नाबालिग वाहन चालकों पर सख्ती, तीन दिन में 145 चालान
राजधानी में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूली ऑटो संचालित करने वालों के खिलाफ यातायात पुलिस ने विशेष अभियान तेज कर दिया है। पुलिस कमिश्नरेट रायपुर की इस कार्रवाई के तहत पिछले तीन दिनों में 145 मामलों में वैधानिक कार्रवाई की गई।
पुलिस उपायुक्त (यातायात) डॉ. अर्चना झा के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य केवल नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों और अभिभावकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।
कई स्कूलों के बाहर हुई जांच
अभियान के दौरान केपीएस स्कूल कमल विहार, आत्मानंद स्कूल पचपेड़ी नाका, भारत माता स्कूल टाटीबंध, जे.आर. दानी स्कूल कालीबाड़ी, देशबंधु स्कूल अग्रसेन चौक, रेयान स्कूल अवंती विहार और केंद्रीय विद्यालय डब्ल्यूआरएस कॉलोनी सहित शहर के कई विद्यालयों के बाहर विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान नाबालिगों द्वारा मोटरसाइकिल चलाकर स्कूल आने और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ऑटो चलाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
अभिभावकों की हुई काउंसलिंग
यातायात पुलिस ने कार्रवाई के साथ-साथ नाबालिग वाहन चालकों के अभिभावकों को यातायात मुख्यालय, कालीबाड़ी बुलाकर काउंसलिंग भी की। सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े वीडियो और प्रेजेंटेशन के माध्यम से उन्हें कम उम्र में वाहन चलाने के खतरों से अवगत कराया गया।
पुलिस ने बताया कि नाबालिग को मोटर वाहन उपलब्ध कराना मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है और इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
स्कूल प्रबंधन के साथ भी बैठक
यातायात पुलिस ने विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों के साथ समन्वय बैठक कर विद्यालय परिसर में नाबालिग विद्यार्थियों के वाहन लेकर आने पर रोक लगाने, अभिभावकों को नियमित रूप से जागरूक करने और सुरक्षित स्कूल परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने पर चर्चा की।
अभिभावकों से अपील
पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए स्कूल बस, अधिकृत ऑटो-रिक्शा या अन्य सुरक्षित परिवहन का उपयोग करें और किसी भी स्थिति में नाबालिग बच्चों को दोपहिया या अन्य मोटर वाहन न चलाने दें।
सुरक्षित यातायात संस्कृति पर जोर
डीसीपी यातायात डॉ. अर्चना झा ने कहा कि यातायात व्यवस्था में स्थायी सुधार केवल चालान से संभव नहीं है। इसके लिए समाज, विद्यालय, अभिभावकों और बच्चों की संयुक्त भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार और अनुशासित नागरिक तैयार किए जा सकें।



