स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति अपर्याप्त, जो भर्ती उसकी भी माॅनिटरिंग नहीं—विशेष बच्चों की शिक्षा पर सरकार की लापरवाही : आम आदमी पार्टी

स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति अपर्याप्त, जो भर्ती उसकी भी माॅनिटरिंग नहीं—विशेष बच्चों की शिक्षा पर सरकार की लापरवाही : आम आदमी पार्टी

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में स्पेशल एजुकेटर की भर्ती को लेकर आम आदमी पार्टी ने गंभीर सवाल उठाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी बी एल देवांगन को ज्ञापन सौंपा। पार्टी का आरोप है कि विभाग ने 100 स्पेशल एजुकेटर पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया, लेकिन नियुक्ति केवल 62 पदों पर की गई, जबकि बाकी 38 पदों को लेकर विभाग ने स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। विभाग की अपनी हालिया जानकारी के अनुसार प्रदेश में दिव्यांग बच्चों के लिए 848 स्पेशल एजुकेटर पद स्वीकृत हैं और वर्ष 2025 में केवल 62 पदों पर सीधी भर्ती की गई।
                   आम आदमी पार्टी प्रदेश सचिव संजय यादव ने कहा कि सरकार एक तरफ दिव्यांग बच्चों को बेहतर और समावेशी शिक्षा देने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जिन बच्चों को सबसे ज्यादा विशेष शैक्षणिक सहायता की जरूरत है, उन्हीं के लिए स्वीकृत पदों पर भर्ती पूरी नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा, "यह केवल 38 पदों का मामला नहीं है, यह हजारों विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के भविष्य का सवाल है। जब विभाग ने 100 पदों का विज्ञापन निकाला था तो 62 नियुक्तियों के बाद बाकी 38 पदों को क्यों छोड़ा गया? अगर पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध थे तो उनकी नियुक्ति क्यों नहीं हुई? और अगर पद खाली हैं तो उनकी निगरानी कौन कर रहा है?"
                    प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेन्द्र चन्द्राकर ने कहा कि प्रदेश में कई स्थानों पर स्पेशल एजुकेटर नियुक्त होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त संख्या में दिव्यांग बच्चों तक पहुंचाने, स्कूलों में नियमित शैक्षणिक कार्य कराने और उनकी मॉनिटरिंग की स्पष्ट व्यवस्था दिखाई नहीं देती। "कहीं स्पेशल एजुकेटर हैं लेकिन बच्चे तक सेवा नहीं पहुंच रही, तो कहीं बच्चों को विशेषज्ञ शिक्षक की जरूरत है, लेकिन पद ही खाली हैं। यह व्यवस्था की दोहरी विफलता है।"

 महासमुंद का उदाहरण भी सामने 

महासमुंद जिला प्रशासन की वेबसाइट पर स्पेशल एजुकेटर के अभ्यर्थियों की चयन एवं प्रतीक्षा सूची जारी होने का रिकॉर्ड उपलब्ध है। इससे स्पष्ट है कि जिले में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति और चयन की प्रक्रिया पहले से चलती रही है।
आप का कहना है कि महासमुंद जैसे जिलों में नियुक्त स्पेशल एजुकेटरों की वास्तविक कार्यस्थिति की जिला स्तर पर समीक्षा होनी चाहिए—वे किन स्कूलों में पदस्थ हैं, कितने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सेवाएं दे रहे हैं, उनकी दैनिक/साप्ताहिक उपस्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों की मॉनिटरिंग कौन कर रहा है तथा कितने बच्चे वास्तव में इसका लाभ उठा रहे हैं।
पार्टी ने कहा कि केवल नियुक्ति आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। स्पेशल एजुकेटर का काम सामान्य शिक्षक से अलग होता है और उन्हें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार शैक्षणिक सहयोग, व्यवहारिक विकास, संचार कौशल तथा समावेशी शिक्षा में सहायता करनी होती है।

 स्कूल भवन ही नहीं, पढ़ाई की व्यवस्था भी बदहाल 

जिलाध्यक्ष राकेश झाबक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा व्यवस्था की समस्या केवल जर्जर भवन, टूटे कमरों, शौचालय और पेयजल तक सीमित नहीं है। "सरकार स्कूल भवनों की मरम्मत की बातें करती है, लेकिन स्कूल के अंदर पढ़ाई की गुणवत्ता और विशेष बच्चों के लिए जरूरी शैक्षणिक व्यवस्था पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।"
उन्होंने कहा कि विभाग को तत्काल 100 पदों की भर्ती में बचे 38 पदों की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, प्रदेश के सभी नियुक्त स्पेशल एजुकेटरों की स्कूलवार सूची जारी करनी चाहिए और यह भी बताना चाहिए कि प्रत्येक जिले में कितने विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं तथा उन्हें कितने स्पेशल एजुकेटरों की सेवाएं मिल रही हैं।
आप ने मांग की कि स्पेशल एजुकेटरों की स्वतंत्र मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाई जाए, खाली पद तत्काल भरे जाएं और महासमुंद सहित सभी जिलों में स्कूलवार ऑडिट कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी विशेष आवश्यकता वाला बच्चा विशेषज्ञ शिक्षक के अधिकार से वंचित न रहे।
उन्होंने कहा, "दिव्यांग बच्चों की शिक्षा सरकार की कृपा नहीं, उनका अधिकार है। सरकार को आंकड़ों और घोषणाओं से बाहर निकलकर जमीन पर यह बताना होगा कि कितने बच्चों तक स्पेशल एजुकेटर पहुंच रहे हैं।"