निर्यात कुप्रबंधन और एथेनॉल नीति के कारण बेकाबू हुए शक्कर के दाम : कन्हैया
देश में रोजाना बढ़ती महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़कर रख दी है। कभी ₹30 प्रति किलो बिकने वाली शक्कर आज खुदरा बाजार में ₹60 से ₹65 प्रति किलो का आंकड़ा पार कर चुकी है। शक्कर की कीमतों में आई यह आग मोदी सरकार के प्रशासनिक कुप्रबंधन, गलत प्राथमिकताओं और जमाखोरों पर से नियंत्रण हटने का प्रत्यक्ष परिणाम है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने उक्ताशय का बयान जारी करते हुए कहा कि देश में गन्ने और चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं थी, लेकिन केंद्र सरकार की नीतियां ही इस संकट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं । उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने खाद्य सुरक्षा की अनदेखी करते हुए गन्ने के बड़े हिस्से को एथेनॉल निर्माण (पेट्रोल ब्लेंडिंग) की ओर डाइवर्ट कर दिया। भोजन की बुनियादी जरूरत को किनारे रखकर ईंधन उद्योग को प्राथमिकता देने से बाजार में चीनी की किल्लत पैदा हुई ।
अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने बिना जमीनी आकलन के चीनी के अनियंत्रित निर्यात की अनुमति दी। जब घरेलू स्टॉक खतरनाक स्तर पर गिर गया, तब जाकर सरकार की नींद खुली और आनन-फानन में प्रतिबंध लगाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा उत्पादन वाले राज्य महाराष्ट्र और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद सट्टेबाजों और बड़े जमाखोरों पर कोई नकेल नहीं कसी गई, जिससे दामों में कृत्रिम उछाल आया । सरकार के गलत फैसलों के कारण देश का शुगर स्टॉक बीते 15 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिसका खामियाजा अब देश का आम नागरिक भुगत रहा है ।
कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि "मंहगाई की मार, शक्कर भी 60 पार मोदी सरकार के कुशासन का जीता-जागता उदाहरण है। आगामी त्योहारों के समय शक्कर महंगी होने से मिठाइयों से लेकर गरीब की चाय तक सब महंगी हो चुकी है। कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि यदि मोदी सरकार ने तुरंत चीनी पर से आयात शुल्क हटाने, जमाखोरी पर रोक लगाने और एथेनॉल डाइवर्जन पर नियंत्रण कर कीमतें कम करने के कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करेगी ।



