170 ट्रांजेक्शन, ₹66 लाख और CGPSC घोटाला: चेतन बोरघरिया ED की हिरासत में

170 ट्रांजेक्शन, ₹66 लाख और CGPSC घोटाला: चेतन बोरघरिया ED की हिरासत में

छत्तीसगढ़ के चर्चित PSC राज्य सेवा परीक्षा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर और मुख्यमंत्री कार्यालय में तत्कालीन OSD रहे चेतन बोरघरिया को ED ने 11 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। अब रायपुर स्थित विशेष PMLA कोर्ट ने उन्हें 6 दिन की ED हिरासत में भेज दिया है।

ED ने जारी प्रेसनोट में जांच से जुड़े कई अहम दावे और वित्तीय लेन-देन की जानकारी साझा की है। जांच के मुताबिक, संबंधित अवधि में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपये नकद जमा किए गए थे।

66.64 लाख रुपये के 170 ट्रांजेक्शन ने बढ़ाई जांच
ED के अनुसार, वित्तीय जांच में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में बड़ी संख्या में नकद जमा होने की जानकारी सामने आई। संबंधित अवधि में 170 लेन-देन के माध्यम से 66.64 लाख रुपये जमा किए गए।

जांच एजेंसी ने चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्रकार के बीच कई वित्तीय लेन-देन सामने आने का भी दावा किया है। ED के मुताबिक, डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में दोनों के बीच वित्तीय लेन-देन और धन वापसी या भुगतान की मांग से जुड़े संचार का भी पता चला है।

उम्मीदवारों से 3 करोड़ रुपये से ज्यादा लेने का दावा
ED के प्रेसनोट के मुताबिक, जांच में उत्कर्ष चंद्रकार, अनिल चंद्रकार और डॉ. विकास चंद्रकार द्वारा CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के विभिन्न उम्मीदवारों से 3 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध रिश्वत लेने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसी का दावा है कि उम्मीदवारों को पहले से प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में कथित संपर्क एवं प्रभाव का इस्तेमाल कर उनका चयन सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया गया था।

ED के अनुसार, इन कथित आश्वासनों के संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और आधिकारिक पद का भी इस्तेमाल किया गया।

सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में जुटाए गए थे उम्मीदवार?
ED के मुताबिक, जांच में कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसी का दावा है कि प्रारंभिक परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में इकट्ठा किया गया था, जहां कथित तौर पर उन्हें लीक प्रश्नपत्र दिए गए। इसके बाद उम्मीदवारों को बरनावापारा अभयारण्य स्थित रिसॉर्ट में ठहराया गया, जहां मुख्य परीक्षा से संबंधित कथित लीक प्रश्नपत्रों के आधार पर कोचिंग दिए जाने की बात सामने आई।

1 सितंबर को हुई थी चेतन बोरघरिया के ठिकानों पर तलाशी
ED ने बताया कि इससे पहले 1 सितंबर 2026 को PMLA के तहत चेतन बोरघरिया के परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण बरामद कर जब्त किए गए।

ED के अनुसार, इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्रकार के बीच वित्तीय लेन-देन तथा धन वापसी/भुगतान की मांग से संबंधित बातचीत सामने आई।

जांच में मेसर्स फिगरकेव ई-कॉम (OPC) प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन का भी पता चलने की बात ED ने कही है। एजेंसी को इन लेन-देन के जरिए धन की हेराफेरी और हस्तांतरण किए जाने का संदेह है।

6 दिन की ED हिरासत, आगे की जांच जारी
ED के मुताबिक, डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों से चेतन बोरघरिया की कथित आपराधिक आय से संबंधित गतिविधियों में संलिप्तता के संकेत मिले हैं।

इसके आधार पर उन्हें 11 सितंबर 2026 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रायपुर स्थित विशेष PMLA न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने आगे की जांच के लिए उन्हें 6 दिन की ED हिरासत में भेज दिया।

ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।