विश्व पर्यावरण दिवस पर कोपाल वाणी की अनूठी पहल दिव्यांग बच्चों की कलाकृतियों से सजे मिट्टी के प्लांटर्स देंगे पर्यावरण संरक्षण का संदेश

विश्व पर्यावरण दिवस पर कोपाल वाणी की अनूठी पहल  दिव्यांग बच्चों की कलाकृतियों से सजे मिट्टी के प्लांटर्स देंगे पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रायपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कोपाल वाणी संस्थान द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं दिव्यांग बच्चों के सशक्तिकरण को जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की गई है। संस्थान के श्रवण एवं मूक  बधीर (सुन और बोल नहीं सकने वाले) बच्चों ने मिट्टी के पॉट्स पर आकर्षक छत्तीसगढ़ी लोककला एवं आधुनिक पेंटिंग्स बनाकर उन्हें सुंदर प्लांटर्स का रूप दिया है।

इन प्लांटर्स के माध्यम से बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया है। सामान्यतः विभिन्न कार्यक्रमों एवं अवसरों पर फूलों के बुके भेंट किए जाते हैं, जो कुछ समय बाद अनुपयोगी होकर फेंक दिए जाते हैं। इसके विपरीत पौधों सहित मिट्टी के प्लांटर्स लंबे समय तक लोगों के घरों एवं कार्यालयों में रहकर पर्यावरण एवं उस विशेष अवसर की स्मृति को जीवंत बनाए रखते हैं।

दिव्यांग बच्चों द्वारा तैयार किए गए इन आकर्षक प्लांटर्स को खरीदने के लिए अनेक सामाजिक एवं व्यावसायिक संस्थाएं आगे आईं। इनमें टोयोटा शोरूम टाटीबंध शाखा, सहेली फाउंडेशन, वंडर किड्स, पीक होम्योपैथिक क्लिनिक सहित अन्य संस्थाओं ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ये संस्थाएं अपने ग्राहकों, सहयोगियों एवं शुभचिंतकों को यही प्लांटर्स भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगी।

कोपाल वाणी  की अध्यक्ष श्रीमती पदमा शर्मा ने बताया कि श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों के लिए समाज के साथ संवाद स्थापित करना सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में जब संस्थानों एवं समाज द्वारा उनके बनाए उत्पादों को खरीदा जाता है, तो बच्चों को न केवल रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं बल्कि उनका आत्मविश्वास और मनोबल भी बढ़ता है। उन्होंने कहा कि यदि संस्थान को एक साथ बड़े ऑर्डर प्राप्त होते हैं तो बच्चों के लिए नियमित रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित होते हैं।

उन्होंने बताया कि इन प्लांटर्स पर कलाकृतियां बनाने में दिव्य प्रकाश गुरुंग, नेहा दुबे, गोकर्ण पाटिल एवं वेद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बच्चों की मेहनत और रचनात्मकता के परिणामस्वरूप लगभग 500 अधिक प्लांटर्स तैयार किए गए, जिन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा क्रय किया गया है।

कोपाल वाणी ने समाज से एक विशेष अपील भी की है। संस्थान का मानना है कि लोग विभिन्न कार्यक्रमों में 150 से 200 रुपये तक के फूलों के बुके भेंट करते हैं, जो कुछ समय बाद डस्टबिन में चले जाते हैं। यदि इसी राशि में दिव्यांग बच्चों द्वारा निर्मित पर्यावरण-अनुकूल प्लांटर्स खरीदे जाएं, तो एक ओर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर दिव्यांग बच्चों को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी प्राप्त होगा।

संस्थान ने नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं कॉर्पोरेट संस्थानों से इस अभियान से जुड़ने और दिव्यांग बच्चों द्वारा निर्मित उत्पादों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समावेशी समाज निर्माण की दिशा में भी सार्थक कदम बढ़ाया जा सके।