6 सूत्रीय मांगों को लेकर कोटवारों ने खोला मोर्चा, 3 जुलाई को धरना
छत्तीसगढ़ के 16 हजार कोटवारों ने अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 3 जुलाई को लामबंद कोटवार तहसील स्तर पर एक दिवसीय धरना देकर शासन का ध्यान अपनी लंबित मांगों के प्रति आकर्षित कराने जुटेंगे। कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के प्रांत अध्यक्ष प्रेमकिशोर बाघ ने कहा, कई बार ध्यान आकर्षित कराने के बाद भी उनकी मांगों को पूरा नहीं होने से प्रदेशभर के कोटवारों में आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी है, यदि 15 अगस्त तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रदेशभर के 16 हजार कोटवार प्रदेश व्यापी आंदोलन करेंगे।
कोटवारों को नियमित कर राजस्व विभाग में संविलयन करने, प्रतिमाह कम से कम 15 हजार रुपए वेतन भुगतान और कोटवारों की नियुक्ति में कोटवारों के परिवार के सदस्यों की नियुक्ति में प्राथमिकता देने सहित 6 सूत्रीय मांग को लेकर प्रदेश भर के कोटवार 3 जुलाई को दोपहर 3 बजे तहसील स्तर पर एक दिवसीय धरना देकर संबंधित तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। प्रांतीय संघर्ष समिति के आव्हान पर प्रदेश भर के कोटवार एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में शामिल होकर अपने लंबित मांगों को लेकर हक की आवाज बुलंद करेंगे।
न तो नियमितीकरण हुआ, न ही शासकीय कर्मचारी का दर्जा मिला
कोटवारों की मांग के संबंध में प्रांताध्यक्ष प्रेमकिशोर बाघ ने बताया कि, दुर्भाग्य की बात है कि एक अरसे से पीढ़ी दर पीढ़ी शासन प्रशासन एवं आम जनता की सेवा कर रहे कोटवारों का न तो नियमितीकरण हुआ, न ही उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा मिल पाया। बच्चों की पढ़ाई, लिखाई के लिए और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोटवारों के लिए कोई योजना नहीं है। शासन के कोटवारों के प्रति उदासीन रवैये से नाराज प्रदेश के कोटवार एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपेंगे।
समान काम समान वेतन की मांग को लेकर राज्य अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन
शिक्षा विभाग में संविलयन और समान काम, समान वेतन सहित 4 सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को प्रांतीय अतिथि शिक्षक संघ ने दुर्ग में रैली निकालकर प्रदर्शन किया। 5 जुलाई को राज्य अतिथि शिक्षक अपने लंबित मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव करेंगे। इसी तरह 12 तारीख को रायपुर जल सत्याग्रह कर राज्य अतिथि शिक्षक विरोध जताएंगे। 14 जुलाई को अर्ध नग्न प्रदर्शन कर अपनी मांगों से अवगत कराने का कार्यक्रम रखा गया है। प्रांतीय अतिथि शिक्षक कल्याण संघ के धर्मेंद्र वैष्णव ने बताया कि प्रदेश भर में 1650 राज्य अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं जो कि कक्षा अध्यापन, आईसीटी प्रशिक्षण, चुनाव कार्य, एनएसस प्रभारी, छात्रवृति कार्य, बोर्ड परीक्षाओं का पर्यवेक्षण और मूल्यांकन कार्य में नियमित शिक्षकों के समान अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बाद भी इन शिक्षकों को नियमितीकरण, समान काम समान वेतन, अवकाश, सेवा सुरक्षा जैसी सुविधाएं प्रदान नहीं की गई है। इससे राज्य अतिथि शिक्षकों में नाराजगी व्याप्त है।
प्रमुख मांगें
राज्य के सभी अतिथि शिक्षक का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलयन किए जाएं
ग्रीष्म अवकाश अवधि का नियमित मानदेय प्रदान करने की मांग
समान कार्य समान वेतन के सिद्धांत के तहत व्याख्याता पद के समकक्ष वेतनमान दिया जावे
राज्य स्तरीय अतिथि शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों के समान अवकाश की पात्रता हो।



