सौम्या चौरसिया की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
सौम्या चौरसिया द्वारा आयकर अधिनियम के तहत जारी अभियोजन सैंक्शन नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन की वैधता से जुड़े सभी तर्क उचित समय पर सक्षम अदालत के समक्ष उठाए जा सकते हैं।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने की। अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें सौम्या चौरसिया की अपील को पहले ही खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट इस मामले में सभी दलीलों की स्वतंत्र रूप से जांच कर सकेगी और वह हाई कोर्ट के आदेश से प्रभावित नहीं होगी।
क्या है मामला
फरवरी 2020 में छत्तीसगढ़ में सौम्या चौरसिया के निवास और अन्य ठिकानों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग ने उनके खिलाफ आकलन (असेसमेंट) प्रक्रिया शुरू की थी। वर्ष 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया था और बाद में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कीं।
इसके बाद आकलन अधिकारी ने जांच पूरी करते हुए आदेश जारी किया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए सौम्या चौरसिया ने आयकर आयुक्त के समक्ष अपील दायर की थी। बाद में उनके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई, जबकि ईडी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी।
हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
सौम्या चौरसिया ने आयकर अधिनियम 1961 की धारा 279(1) के तहत पीसीआईटी (Principal Commissioner of Income Tax) द्वारा 10, 11 और 19 फरवरी 2025 को जारी आदेशों को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इन आदेशों के तहत विभिन्न आकलन वर्षों के लिए आयकर अधिनियम की धारा 276C और 278E के तहत उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जब कर चोरी की राशि 25 लाख रुपये से अधिक हो, तो अभियोजन शुरू करने की अनुमति देने का अधिकार पीसीआईटी को होता है। कोर्ट ने माना कि इस मामले में कथित राशि 25 लाख से कहीं अधिक है, इसलिए अभियोजन की अनुमति देने का अधिकार पीसीआईटी के पास ही था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब इस मामले में आगे की सुनवाई संबंधित सक्षम अदालत में होगी।



